वर्ष 1999 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNESCO ने इसे मनाने की घोषणा की थी और वर्ष 2000 से हर साल ये एक दिन मातृभाषा को समर्पित होता है. हालांकि आज का कड़वा सच ये है कि हर 14 दिन में दुनिया में एक भाषा विलुप्त हो जाती है. इसलिए सोचिए कि ये दिन भारत के लिए कितना व्यावहारिक है?
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